Tuesday, April 29, 2025

ख़ुद की खरीद

 सोचा था फुर्सत में ख़ुद को लिखूंगा


शायर नहीं, अच्छा; सच्चा इंसान दिखूंगा


नासमझी थी या नादानी, समझदारी सीखूंगा


ख़रीद लिया है ख़ुद को ख़ुद से, अब नहीं बिकुंगा


Samar Sudha

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