Words Reflect My Life.
सोचा था फुर्सत में ख़ुद को लिखूंगा
शायर नहीं, अच्छा; सच्चा इंसान दिखूंगा
नासमझी थी या नादानी, समझदारी सीखूंगा
ख़रीद लिया है ख़ुद को ख़ुद से, अब नहीं बिकुंगा
Samar Sudha
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