Tuesday, May 13, 2025

ख़ामोशी

 मेरी ख़ामोशी ख़ामोश है, 

सार्गोशियां सारगोश है


सूर्तेहाल मत पूछें, मदहोश हैं 

या यूं कहिए के बेहोश हैं


ज़हनी मसले है उलझे, कुछ रोश हैं 

कितने इल्जाम गिनवाएं, लाखों दोष हैं


इसलिए ख़ामोशी मेरी खामोश हैं

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