Words Reflect My Life.
"मेरी तलब थी वो खातुन;
पागलपन. इश्क या था अनूठा जुनून"
"दिन की शुरुआत उनसे, शाम का ढालना था;
मुस्कान भर से ही, दिल का पिघलना था"
"जीवन का वो दौर, कर दिया था नीलाम;
अंधा था विश्वास, बुरा होना ही था अंजाम "
No comments:
Post a Comment