Wednesday, January 7, 2026

तलब

 "मेरी तलब थी वो खातुन;

पागलपन. इश्क या था अनूठा जुनून"


"दिन की शुरुआत उनसे, शाम का ढालना था;

मुस्कान भर से ही, दिल का पिघलना था"


"जीवन का वो दौर, कर दिया था नीलाम;

अंधा था विश्वास, बुरा होना ही था अंजाम "

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